The Generation of Unknown

2018, the year when millennials start turning into adults. With this they become a part of the electorate. This generation is now going to be an influential factor in political powers deciding their course of action. One might wonder that every year a new lot of voters get added into the electorate, so what is…

नींद के बाद

एक दुनिया है

पुर सुकूँ, महफूज़, ख़ूबसूरत

जो बसाई है मैंने नींद के पार

मेरे सिरहाने से एक मोड़ जाता है

वहीं से सीधे बढ़ जाना

जब लगे कि छूट चुका ग़म पीछे

और मुमकिन लगे दौड़ना, उड़ना और इश्क़

उलझन

बेतरतीब, उलझे हुए धागे के जैसे होती हैं यादें

कभी कभी इसका एक सिरा आता है हाथ में

उम्मीद जगती है इसे सुलझा लेने की मगर

जैसे जैसे उस सिरे से आगे बढ़ते जाते हैं

उलझ जाती है उँगलियाँ भी धागे की उलझनों में

उलझते ही जाते हैं यादों के धागे और उन धागों में हम
……..

हुस्न

..और जब तुम मेरे कहने पे

कि तुम कितनी ख़ूबसूरत हो

मेरा ऐतबार नहीं करती तो मैं निराश होता हूँ

मैं सोचता हूँ

कि क्या तुम भी वो पैमाने मानती हो हुस्न के

जो कि छिछले और व्यर्थ हैं?

मैं तुम्हें जानता हूँ

हाथ से निकली लड़कियां

ज़माना तुम्हें देखता है

कुछ विस्मय, कुछ घृणा तो कुछ भय से

इसलिए कि तुम वो नहीं जो तुमसे आशा की गयी थी

जो तुम्हें ज़माना बनाना चाहता था

तुमने उस से बग़ावत की और बन गयी

वो जो तुम बनना चाहती थी।