गर्मी की एक रात

तो सूरत ए हाल ये है कि बिजली आधे घंटे से गयी हुई है और जनरेटर बिना तेल के टें बोल गया है। फलस्वरूप बालकनी में प्लास्टिक का हाथ पंखा लिए और लाखों मील दूर चमकते चाँद से शीतलता की उम्मीद लिए खड़े हैं। शहरों में बिजली जाने पर ही इंसान को सही मायनों में खुद का अहसास होता है वरना हम तो बस अपने घर के इलेक्ट्रॉनिक्स सामानों के ही गुलाम बने रहते हैं। तो बस इसी मजबूरन मिली आज़ादी का लुत्फ़ लेते हुए मन भटकते भटकते यादों के शहर जा पहुंचा। वक़्त वो था जब ऐसे फुर्सत के लम्हों से फुर्सत नहीं मिलती थी। तब जब गर्मियों की रातें ऐसे पिंजरानुमा बालकनी में नहीं, मैदानी छत पर गुज़रा करती थी। तब ये कूलर में पानी बरफ भर के नहीं बल्कि कच्चे ताड़ के पत्तों के पंखे को पानी में भींगा के झलते झलते गर्मी से तलवारबाज़ी होती थी। तब दादी की कहानियां थी, मम्मी के हाथ की बानी गरम गरम चाँद जैसी गोल सफ़ेद रोटी थी, लालटेन को घेर के पापा की डांट के डर से होने वाली पढाई थी और हाँ, एक वो भी तो थी। वो जिसकी दो छोटी छोटी चोटियां थी, जिसकी वो फेवरेट वाली पोल्का डॉट वाली लाल फ्रॉक थी, जो सबसे तेज़ आवाज़ में लड़ती थी मगर मुझे देख के पता नहीं क्यों अपना रुख थोड़ा नरम कर लेती थी। उसकी छत और मेरी छत के बीच बस एक ही मुंडेर थी। जी नहीं ये कोई दोनों घर के मालिकों का अपनापन नहीं बल्कि एक सुई के नोंक जितनी जमीन न छोड़ने की ज़िद थी। भला हो इस लालच का कि हम दोनों के बीच भी तब वही एक मुंडेर थी जिसे जब चाहे लांघ सकते थे। ऐसी ही कोई रात होगी, जब चाँद पुरे से थोडा कम था। उस रात, दिन में भरपूर सोने की वजह से, नींद आ नहीं रही थी। तभी मैंने उसे हमारी मुंडेर पर बैठे देखा था। ये उसकी रोज़ की आदत थी, पता नहीं उन तारों में क्या ढूंढती थी वो। तब अंधेरों से मेरी घिग्घी बंध जाती थी, लगता था की इन्ही अंधेरों में कोई उलटे मुंह वाली चुड़ैल छुपी है। मगर उस रात ऐसे ही डरते कांपते और मन में हनुमान चालीसा दोहराते उस मुंडेर पर उसके साथ जा के बैठा। पता नहीं क्यों मगर एक दूसरे से कुछ बात नहीं की। उसने बस मेरा हाथ पकड़ के मेरे कंधे पर अपना सर टिका दिया। उस उम्र तक टीवी सिनेमा में आई लव यू तो बहुत सुना था मगर प्यार क्या होता है इस का धेला भर भी अंदाजा नहीं था। मगर जब उसका सर मेरे कंधे पर आया तो उस वक़्त मेरे मन में से अँधेरे का डर काफूर हो गया था।

 

Disclaimer: The featured image is taken from the Internet and is believed to be in open domain.

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