गुमशुदा

“प्रिया उठ जा वरना पीटूँगी आ के”, सुनीता ने किचन से चौथी बार चिल्लाते हुए कहा। हर रोज़ की तरह उसकी ग्यारह साल की बेटी प्रिया आज भी सो कर उठने में देर कर रही थी। “एक तो ये मालती पता नहीं कहाँ गायब हो गयी बिना बताये ऊपर से ये अलग है”, सुनीता बड़बड़ाते हुए अपनी बेटी के कमरे की तरफ जाने लगी। दरवाजे पर धक्का मारा तो दरवाजा खुला नहीं, ये उसे अजीब लगा। “प्रिया! दरवाज़ा अंदर से क्यों बंद किया है? अभी के अभी खोलो इसे”, दरवाज़ा पीटते हुए गुस्से भरी आवाज़ में सुनीता ने कहा। पहले कभी प्रिया ने ऐसे नहीं किया था। पिछले 10-12 दिनों से उसके बर्ताव में भी काफी अजीब सा बदलाव आया था। अब वो काफी कम बोलती थी, बोलती भी तो बात करने के अंदाज़ में एक रूखापन आ गया था। इन बातों पर सुनीता ने ज़्यादा गौर नहीं किया था, आजकल उसके ऑफिस में काम का बहुत ज़्यादा प्रेशर था उस पर।
अभी तक अंदर से कोई आवाज़ नहीं आने से सुनीता अब परेशान हो गयी थी। जैसे ही उसने दुबारा दरवाजा पीटने के लिए अपने हाथ उठाये, दरवाजा खुल गया और सामने खड़ी प्रिया उसे पहले तो अजीब ढंग से घूरने लगी फिर बिना कुछ कहे बाथरूम की तरफ चल पड़ी। उसकी ऐसी बदतमीज़ी से सुनीता का पारा चढ़ गया। वो कुछ कहने ही वाली थी कि कॉलबेल बजी। दरवाजा खोला तो सामने उसकी पड़ोसन शिल्पा थी। “मालती तुम्हारे यहाँ ही है अभी तक?”, शिल्पा ने पूछा। “नहीं तो, आज तो वो मेरे यहाँ काम करने आयी ही नहीं”, सुनीता ने जवाब दिया। मालती इन दोनों के यहाँ काम करने वाली नौकरानी थी। “मैंने उसके यहाँ फोन किया तो उसकी बेटी बोली कि वो तो सुबह तुम्हारे यहाँ आने के लिए निकली थी”, शिल्पा ने बताया। ये सुन कर सुनीता को अजीब लगा, “मैं तो यहाँ सुबह से इंतज़ार कर रही हूँ”। “अजीब है, खैर अगर वो आये तो फोन कर देना” ये कह कर उसकी पड़ोसन चली गयी। फिर सुनीता भी प्रिया को स्कूल भेजने के बाद तैयार हो के ऑफिस के लिए निकल गयी।
शाम को सुनीता घर आयी तो देखा कि प्रिया टीवी के सामने बैठी हुई हंस रही है। “क्या देख रही है गुड़िया?” सुनीता ने लाड़ से पूछा। उसकी आवाज़ सुनते ही प्रिया का हँसना बंद हो गया और वो झट से उठ के किचन की तरफ चली गयी। सुनीता को फिर गुस्सा आ गया, तभी उसने टीवी की ओर देखा तो पाया की उसमे तस्वीर आ ही नहीं रही। उसे ये बात बहुत अजीब लगी। जैसे ही वो किचन की ओर कुछ बोलने को मुड़ी, प्रिया को अपने सामने हाथ में पानी का गिलास लिए देखा जो वो उसके लिए लायी थी। ये देख सुनीता खुश हो गयी और प्रिया के सर पे हाथ फेर कर उसके हाथ से पानी का गिलास लिया। फिर प्रिया सोफे पर पड़ी अपनी किताब उठा अपने कमरे में चली गयी।
आधी रात को सुनीता की नींद अचानक से एक बुरे सपने की वजह से खुली। पसीने से तरबतर अपनी सांसों को काबू में करने के बाद वो पानी पीने किचन जाने को हुई। तभी उसे प्रिया के रूम से कुछ आवाज़ आयी। चेक करने के लिए वो उसके रूम की तरफ गयी। दरवाजा सटा हुआ था मगर लॉक नहीं था। आहिस्ता से उसे खोल के हलके क़दमों से सुनीता रूम में घुसी, उसके बाद उसने जो देखा तो उसकी आँखे फट गयी, उसके कदम कमज़ोर पड़ने लगे और उसका दिल मुँह को आ गया। उसने देखा कि बिस्तर के पास मालती की लाश पड़ी है, उसका पेट फटा है और प्रिया का हाथ और मुँह खून से सना है। सुनीता के मुँह से आवाज़ नहीं निकल रही थी , प्रिया ने सर उठा के उसकी तरफ देखा और मुस्कुराने लगी। सुनीता वहाँ से जैसे ही भागने को हुई प्रिया के हाथों से बड़ी ताक़त से उसके पैरों को पकड़ खींचा। सुनीता की एक दर्द भरी चीख गूंज उठी और उसके बाद सन्नाटा छा गया। सुबह पड़ोसियों को सुनीता की लाश मिली। उस दिन के बाद से प्रिया को किसीने नहीं देखा।

 

*Disclaimer: The image used is taken from internet and is believed to be in open domain. If there is any objection from the owner of the picture, it will be taken down.

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