वार्तालाप 04

1: अरे भाई! ज़माने बाद मिल रहे हो। कभी हम गरीबों के लिए भी टाइम निकाल लिया करो।
2: क्या बताये भाई, बड़ा कष्ट है ज़िन्दगी में। इतना काम रहता है कि बड़े दिनों से खुद से नहीं मिल पाए तो तुमसे कहाँ से मिलते?
1: बड़के philosopher बन के आये हो बे तुम तो। अच्छा छोडो काम वाम की बात। कुछ मसाला बताओ बहस करने लायक।
2: अबे मसाला का पड़ा है तुमको, यहाँ इतना बड़ा गंभीर मसला है देश के सामने।
1: मसले तो बहुत सारे हैं, तुम किसीकी बात कर रहे हो?
2: अबे ये पाकिस्तान ने जो हरामज़दगी किया है फिर से उसका बोल रहे हैं।
1: हाँ भाई, हरामज़दगी तो पाकिस्तान की foreign policy बन गया है। सुधरने का कोई लक्षण नहीं दिखा रहा है।
2: अबे भाड़ में गया सुधरना सुधारना, अब ये ऐसे नहीं मानने वाला। इतना बड़ा हमला कर के बच जायेगा तो बहुत गलत होगा।
1: तो तेरे हिसाब से क्या couse of action होना चाहिए अब?
2: अब तो पानी सर के ऊपर हो गया है। अब war के अलावा और कोई रास्ता नहीं है।
1: इतना sure है?
2: और नहीं तो क्या। अगर अभी भी छोड़ दिया तो देश की इमेज गलत जायेगी।
1: I don’t know. मुझे तो ये प्रतिष्ठा में प्राण गवांने वाली बात लग रही है।
2: ऐसा कुछ नहीं है। war नहीं तो क्या हम उनको ऐसे ही अपने फौजियों को मारते रहने दे?
1: भाई लेकिन war में भी तो हमारे फौजी मरेंगे, तो कैसे हुआ ये सही रास्ता?
2: मरेंगे लेकिन ये साली प्रॉब्लम का तो परमानेंट इलाज हो जायेगा ना।
1: परमानेंट कैसे? हम already इतनी wars लड़ चुके है और सब जीते हैं फिर भी situation तो बदली नहीं ना। तो ये war कैसे solve कर देगा ये प्रॉब्लम?
2: इस बार पिछली बार जैसे नहीं करेंगे, पूरा ख़तम कर देंगे मामला once and for all.
1: मामला ख़तम करने के लिए पाकिस्तान को खत्म करना पड़ेगा। क्या ये plausible है?
2: क्यों नहीं?
1: भाई तू एक पूरी country को खत्म करने की बात कर रहा है। इसका मतलब समझ रहा है? सिर्फ फौज को नहीं पाकिस्तान को पूरा खत्म करना होगा, this might mean genocide. अब ये तो करने का सवाल ही नहीं है न। इसके अलावा क्या लगता है दो nuclear powers लड़ेंगे तो इसमें global interference नहीं होगा? हमारे सारे relations बिगड़ जायेंगे। इसके अलावा हमारी खुद की इकॉनमी अभी एक war बर्दाश्त कर सकती है क्या? हम लगभग 4-5 साल पिछड़ सकते हैं। और ये बिलकुल afford नहीं कर सकते।
2: तो क्या करें? हाथ पे हाथ धरे बैठे रहे और पाकिस्तान को हमारे फौजी मारते देखते रहे?
1: नहीं, लेकिन war से कुछ solve नहीं होगा। हम पाकिस्तान क्या करता है ये control नहीं कर सकते मगर हम अभी से कहीं ज़्यादा सतर्क रह सकते हैं। घुसपैठ हो रही है तो इसका मतलब चूक हमारे तरफ से भी हो रही है। हमें इसमें और ज़्यादा सख्ती और सावधानी बरतनी पड़ेगी।
2: ये सब बस ज्ञान दे रहे हो बेकार का। हो pacifist तुम बस इसलिए बोल रहे हो ऐसा। war तो ज़रूरी है, अब तुम जैसे लोग बस शांति के कबूतर उड़ाते रहते हो। ठीक कहता है अर्णब की तुम जैसों के लिए ये कुटीर उद्योग जैसा है।
1: अरे शांत गदाधारी भीम, शांत। अच्छा भाई तू लड़ ले पाकिस्तान से लेकिन मुझसे तो मत लड़। फॉर्म खरीदूँ तेरे लिए इंडियन आर्मी का
2: भक बे, तुम साले खाली बात घुमाना जानते हो।

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