वार्तालाप 05

1: अरे भाई, तू इधर कैसे?
2: धनतेरस की शॉपिंग करने आया था, इधर पहचान का एक ज्वेलर है।
1: ओहो! खूब सोना खरीदा जा रहा है। एक हम हैं जो बस झाड़ू खरीद के काम चला रहे हैं।
2: हाँ बे तुम हो ही आपिये तो झाड़ू ही खरीदोगे न।
1: चल बे, ऐसी गालियाँ न दिया कर। तुझे कैसा लगेगा अगर मैंने तुझे भक्त बोल दिया तो।
2: साले! और बता क्या क्या खरीदा है? झोला तो बड़ा भारी लग रहा है।
1: अरे कुछ नहीं यार, बस कुछ लक्ष्मी पूजा का सामान है और थोड़ा डेकोरेशन वगैरह के लिए।
2: वाह रे नास्तिक, पूजा का सामान खरीद रहा है?
1: हाहा, अब मम्मी के आदेश के आगे आस्तिक नास्तिक सब फेल हो जाता है।
2: हाँ ये तो है…एक मिनट। ये क्या है बे? चीनी लाइट की लड़ी!
1: हाँ पुरानी वाली लाइट्स काम नहीं कर रही अब कौन एक एक कर के चेक करे तो नयी ही खरीद ली।
2: साले तुम्ही जैसे लोगों की वजह से चाइना इतना आगे बढ़ रहा है। ऊपर से ऐसे टाइम में जब इतनी टेंशन है चाइना और पाकिस्तान के साथ तो इन सब चीजों का बॉयकॉट करना चाहिए और तू है कि
1: अबे यार तेरा फिर से चालू हो गया। क्या क्या बॉयकॉट करवाओगे बे तुमलोग? क्या हो जायेगा 150 रूपये की लड़ी नहीं खरीद के? बड़ा चाइना का इकॉनमी हिला दोगे?
2: वो सब कुछ नहीं, बात है बात वाली। 150 का ही सही लेकिन हमारी वजह से चाइना को फायदा क्यों हो?
1: अच्छा तो इस से बस चाइना को फायदा होता है? और उन दुकानदारों का क्या जो ये बेच के रोजी रोटी कमा रहे हैं? सब ने बॉयकॉट किया तो हमारे ही देश के दुकानदारों की मरायेगी ना। चाइना तो अपना माल बेच ही लेगा।
2: अबे तो दुकानदारों को भी चाहिए न कि स्वदेशी सामान बेचें। एक बार बॉयकॉट करेंगे तो अगले साल से उन्हें भी समझ आ जायेगी और वो चीनी प्रोडक्ट मंगाएंगे ही नहीं।
1: ऐसा? तो एक बात बता, हम सारे चायनीज़ प्रोडक्ट को रिप्लेस किस चीज़ से करेंगे? कौन सा ऐसा manufacturing sector मजबूत है इंडिया का जो ऐसे affordable और innovative प्रोडक्ट ला सके?
2: अबे तो ट्रेडिशनल दिया जलाओ ना। क्या ज़रूरत है लड़ी जलाने की?
1: अच्छा यानी कि हम दो तीन जनरेशन पहले के प्रोडक्ट यूज़ करें। ये है तेरा प्लान चाइनीज़ प्रोडक्ट से टक्कर लेने का? Consumer अपना नुकसान करवा ले वो सही है?
2: अपने नफे के चक्कर में उन कुम्हारों के नुकसान की बात क्यों भूल जाते हो जो चाइनीज़ सामान की वजह से हो रही है?
1: तो तुम्हे लगता है कि साल के एक दिन तुम दिया खरीद के इनकी ज़िन्दगी बदल डालोगे? बाकी दिन का क्या? जितना ज़ोर शोर से ये व्हाट्सएप्प मैसेज फॉरवर्ड करते हो बॉयकॉट वाला उतनी ज़ोर शोर से सरकारों से इंडिया में घरेलू उद्योंगों को बढ़ावा क्यों नही दिलवाने की बात करो तो बात भी बने। और बाकी दिन कितने चीज़ खरीदते हो कुटीर उद्योग वालों से? बस मौसमी फ़िक्र दिखाने से क्या होगा?
2: भाई साहब सिर्फ समस्या तो बता दिए, हल नहीं बताओगे?
1: हल भी है और वो है चाइना का बॉयकॉट करने की जगह उस से सीख लेना और जैसा उन्होंने अपने देश के manufacturing sector के साथ किया है उसे यहाँ replicate करना। किसी देश के नुकसान कराने की बात मत करो, अपने देश का फायदा कराने की बात करो। व्हाट्सएप पर मैसेज का चेन चलाना आसान है। अगर कुछ बदलना है तो इसको अपने नेताओं के आगे मुद्दा बनाओ। ये नहीं कि वो जो मुद्दा बनाएं उसी को अपना मुद्दा मान लो।
2: तो बस ज्ञान क्यों दे रहे हो भाई, खुद किया है ऐसा।
1: नहीं किया है लेकिन भाई अपनी इस गलती से हम मुंह नहीं चुरा रहे कम से कम।
2: अच्छा चलो इस पर तो और बहस हो सकती है अब निकलते हैं ट्रैफिक बहुत हो रहा है, टाइम पर घर पहुंचना है, मिलते हैं फिर। हैप्पी दिवाली।
1: हाँ हाँ, जाओ अगली बार पटाखों वाली बहस करेंगे।

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