प्रेम विरोधी समाज की पैदाइश एंटी-रोमियो स्क्वाड

विलियम शेक्सपियर के कालजयी नाटक रोमियो एंड जूलिएट के मशहूर डायलॉग्स में एक डायलाग में जूलिएट अपने प्रेमी रोमियो से शिकायती लहजे में पूछती है कि वो रोमियो क्यों है क्योंकि उसका रोमियो होना उनके इश्क़ के रास्ते की सबसे बड़ी रुकावट है। शायद आज यही सवाल उत्तर प्रदेश की तमाम जूलिएट अपने अपने रोमियो से पूछ रही होगी। वो इस सवाल से खुद भी जूझ रही होगी कि आखिर क्यों और कब से उसका इश्क़ प्रदेश के विकास की राह का सबसे बड़ा रोड़ा है?

ये अटपटा सा दिखने वाला सवाल आज इसलिए उठा है क्योंकि उत्तर प्रदेश के नव निर्वाचित मुख्यमंत्री (हालाँकि मुझे नहीं पता निर्वाचित कहना सही होगा या नहीं, फिर भी) योगी आदित्यनाथ का पहला मुख्य फरमान था कि पुलिस गुंडाराज से ग्रस्त यूपी में सारे लवर्स पॉइंट्स की निगरानी करे और कोई “रोमियो” दिखे तो उसे पकड़ ले। नोटबंदी जैसे इस रोमियोबंदी का भी एक जनहित का मकसद बताया गया था कि ये लड़कियों, औरतों को मनचलों से बचने की मुहीम है। और मुझे इस पर पूरा विश्वास है। हाँ वो अलग बात है कि पुलिस और योगी जी की पर्सनल सेना, जो कि यूपी की नाकारा पुलिस की मदद कर रही है, को इस बात का भान नहीं है कि ऐसा भी मुमकिन हो सकता है कि लड़के लड़कियों की मर्ज़ी से उनका हाथ थम के पार्क में घूम सकते हैं। इसमें उनकी गलती भी नहीं है क्योंकि उनको इसका अनुभव नहीं होगा। बहरहाल, इस मुहीम की वजह से कई प्रेमी जोड़े पीटे जा रहे हैं, उनसे उठक-बैठक लगवाई जा रही है और तो और उनको उनके प्रेम के सबसे बड़े दुश्मन यानि कि उनके माता पिता के सामने ज़लील किया जा रहा है। लेकिन मैं इन सब को भी नोटबंदी के दौरान हुई मौतों के जैसे भूल जाने को तैयार हूँ। क्योंकि हमारे प्रधानमंत्री तो सिर्फ आदरणीय थे लेकिन योगी जी अपने भगवा वस्त्रों के बूते आदरणीय होने के साथ साथ पूजनीय भी हैं। इसलिए मैं योगी जी को नमन करता हूँ और और उनकी कोई बुराई न करने की गंगाजली सौगंध खाता हूँ।

योगी जी के इस फैसले से भले ही सैकड़ो जोड़ी दिल टूटे हों, लेकिन दो तबके ऐसे हैं जिन्हें इस फैसले से अपार हर्ष पहुंचा है। एक तो वो तमाम लोग जो रोमियो बनना चाहते थे लेकिन उनको जूलिएट नहीं मिली। उनको आख़िरकार अपनी उदास अकेली ज़िन्दगी पर गर्व होने लगा है। उनका रोमियो न बन पाना उनको “सद्चरित्र” बनने का ढोंग करने का मौका दे रहा है। इनके अलावा जिन्होंने इस फैसले को सुन के घर में घी के दिए जलाये हैं वो हैं माँ-बाप, सिर्फ मेरे वाले नहीं , लगभग सब के। उनको लग रहा है कि आख़िरकार ऐसा मुख्यमंत्री आया है जिसने सबसे ज़रूरी मुद्दे को हाथ लगाया है और वो ये कि किस तरह उनके बच्चों को लव मैरिज करने से रोक जाये। एक एवरेज हिंदुस्तानी माँ-बाप की प्राथमिकता की सूची में ये मुद्दा सबसे ऊपर होता है। जिस तरह के घर से मैं और इस देश के अधिकतर युवा आते हैं, वहां प्रेम में पड़ना किसी कानून तोड़ने से ज़्यादा गंभीर माना जाता है। तो जाहिर सी बात है कि योगी जी को इस फैसले के गलत होने की सम्भावना की चिंता करने की ज़रूरत नहीं है। क्योंकि उनके पक्ष में वो लोग हैं जो इस देश का भविष्य तय करने वाले युवा वर्ग की बागडोर अपने हाथों में लिए हैं। योगी जी ने ऐसा फैसला लिया है इस से किसी को चौकने की ज़रूरत नहीं हुई होगी क्योंकि जिनका पेशा ही नफरत फैलाना हो उनको मोहब्बत से तकलीफ होनी लाज़मी है। सिर्फ योगी जी को भला बुरा बोल इस समस्या से निकला नहीं जा सकता क्योंकि जब तक ये समाज ही प्रेम के विरोध में खड़ा रहेगा तब तक ऐसे कितने ही योगी एंटी-रोमियो बनने की हिम्मत दिखाते रहेंगे। सुधार चाहिए तो हमारे माँ-बाप को सुधरना होगा। किसी प्रेमी जोड़े को पार्क में एक दूसरे के करीब बैठा देख अपनी नाक भौं सिकोड़ना बंद करना होगा। प्रेम प्राकृतिक और ज़रूरी है इस बात को मानना होगा। अभिभावक से तानाशाह बनना बंद करना होगा। बाकी जहाँ तक एंटी-रोमियो स्क्वाड का सवाल है तो इश्क़ पे लगाई पाबंदियां ज़्यादा देर नहीं टिक सकती। तब योगी जी क्या करेंगे जब लाठी भाँजता उनके किसी सैनिक को ही इश्क़ हो जायेगा?

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