लौ

दूर सड़क के उस छोर पर
एक लौ फड़कती दिख रही है,
सर्द हवाओं से लड़ती-जूझती
वो आग भभकती दिख रही है..

मसान: फिल्म से कहीं बढ़ कर

मसान, फिल्म दिल के जितने करीब है उतना करीब शायद ही और कोई फिल्म होगी। कितनी ही बार देख ली होगी ये फिल्म लेकिन हर बार शुरू से प्यार होता है इस से। व्यक्तिगत रूप से मेरे लिए ये एक फिल्म से कहीं बढ़ कर है। ये एक चोट है, उस दीवार पर जो एक…

ग़लतफ़हमी का इश्क़

कोलकाता, इस शहर को मैं प्यार का शहर मानता हूँ। अगर यहाँ रह के प्यार में ना पड़े तो मुमकिन है कि प्यार आपके बस का न हो। इसके पीछे की वजह ये कि ये शहर आपको बहुत से मौके देता है किसी को अपना बनाने के लिए और अपना बनाने के बाद आगे की…

गुमशुदा

“प्रिया उठ जा वरना पीटूँगी आ के”, सुनीता ने किचन से चौथी बार चिल्लाते हुए कहा। हर रोज़ की तरह उसकी ग्यारह साल की बेटी प्रिया आज भी सो कर उठने में देर कर रही थी। “एक तो ये मालती पता नहीं कहाँ गायब हो गयी बिना बताये ऊपर से ये अलग है”, सुनीता बड़बड़ाते…

फ्रेंडशिप डे

ग्लोबलाइजेशन की वजह से जितनी भी चीज़ें हिंदुस्तान में आयी, उनमे से फलाना डे चिलाना वीक वाला सिस्टम सबसे सही लगता है हमको। इसी बहाने से एक एक दिन कर के दिल के अंदर के जज़्बातों को उमड़ उमड़ के निकलने का मौका तो मिलता है। साल का एक दिन तो अपने ज़िन्दगी के किसी…

तलाश

चेहरे पर शिकन, दिल में बेचैनी लिए
अस्थिर आँखों से ज़माने की ख़ाक छानता हूँ
इस छोर से उस छोर तक, गलियों से दर तक
हर कोना हर नुक्कड़ मैं कुछ तलाश करता हूँ…