लौ

दूर सड़क के उस छोर पर
एक लौ फड़कती दिख रही है,
सर्द हवाओं से लड़ती-जूझती
वो आग भभकती दिख रही है..

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Locks

I had a wall around my heart

long and wide and impenetrable.

Made from black mortar

and black were the bricks

Nothing went through

nor came out.

There I sat alone and sad

but I was safe, not this vulnerable.
Then you came along

तलाश

चेहरे पर शिकन, दिल में बेचैनी लिए
अस्थिर आँखों से ज़माने की ख़ाक छानता हूँ
इस छोर से उस छोर तक, गलियों से दर तक
हर कोना हर नुक्कड़ मैं कुछ तलाश करता हूँ…

पहली ग़ज़ल

बड़े दिनों बाद आई चेहरे पे रौनक
बड़े दिनों बाद मेरी गलियों से सनम गुज़रे
चमक उठा है वो धूल-मिट्टी का रास्ता देखिये
कि जिन से हो के उस बेनज़ीर के कदम गुज़रे..

सन्नाटों का शोर

गौर से सुनना कभी
इन गहरे सन्नाटों का शोर
वो चीखें जो तुम तक पहुँचने से पहले
दम तोड़ चुकी थी
……

आशियां

संग अधसोये अधजागे,
एक दूजे की बाँहों में अलसाते
ख्वाबों का वो महल देखा था…..