ग़लतफ़हमी का इश्क़

कोलकाता, इस शहर को मैं प्यार का शहर मानता हूँ। अगर यहाँ रह के प्यार में ना पड़े तो मुमकिन है कि प्यार आपके बस का न हो। इसके पीछे की वजह ये कि ये शहर आपको बहुत से मौके देता है किसी को अपना बनाने के लिए और अपना बनाने के बाद आगे की…

गुमशुदा

“प्रिया उठ जा वरना पीटूँगी आ के”, सुनीता ने किचन से चौथी बार चिल्लाते हुए कहा। हर रोज़ की तरह उसकी ग्यारह साल की बेटी प्रिया आज भी सो कर उठने में देर कर रही थी। “एक तो ये मालती पता नहीं कहाँ गायब हो गयी बिना बताये ऊपर से ये अलग है”, सुनीता बड़बड़ाते…

गर्मी की एक रात

तो सूरत ए हाल ये है कि बिजली आधे घंटे से गयी हुई है और जनरेटर बिना तेल के टें बोल गया है। फलस्वरूप बालकनी में प्लास्टिक का हाथ पंखा लिए और लाखों मील दूर चमकते चाँद से शीतलता की उम्मीद लिए खड़े हैं। शहरों में बिजली जाने पर ही इंसान को सही मायनों में…

बोर्ड एग्जाम

कुछ दिन पहले चल रहे बारहवीं के बोर्ड एग्जाम के एक सेंटर पर जाना हुआ तो 3 साल पहले बीते अपने एग्जाम की याद बरबस ही दिमाग में आ गयी। वो घबराहट भरा एग्जाम डेट का काउंटडाउन, एग्जामिनेशन हॉल की तरफ बढ़ते क़दमों के साथ दिल की धड़कनों बढ़ना और परीक्षा शुरू होने से पहले…

अजनबी

वो दोनों रोज़ ही एक दूसरे को देखा करते थे। वो दसवी की ट्यूशन से लौटती थी और वो उसी कोचिंग में बारहवीं की क्लास करने आता था। जब उसने उसे पहली बार था तो पता नहीं क्यों उसे वो सारी भीड़ धुंधली सी नज़र लगी सिवाय उसके जो अपनी लाल स्वेटशर्ट में चेहरे पर…

नए साल का इज़हार

पहली बार एक आर्चिज़ का ग्रीटिंग कार्ड ख़रीदा था अपना पेट काट के (लंच के समोसों की कुर्बानी दे के)। देना था उसको जिसका नाम ले कर दोस्त हमें चिढ़ाते थे और हम ऊपर से गुस्सा मगर अंदर से मुस्कुराते थे। उसको स्कूल में आये एक ही साल हुआ था तब। अभी भी याद है…